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मेरे जीवन की निर्मल छाया,
होती प्रतीत दो वृक्षों के तले
दो वृक्ष जिन्होंने दिया पोषण दो नन्ही पोधो को
दो नन्ही पौधे पनपी, बढ़ी, फैली, आगे बढ़ी
लकिन जब भी देखा उन्होंने सर उठा कर
पाई ऊपर निर्मल छाया
मेरे जीवन की निर्मल छाया
उन पोधो को दिया आसरा जगत के तूफानों में
जब भी आया झोका तेज़ हवा का फैलाई शाखाएं
लिया समां अपनी शाखायों के मध्य
और मिली उन पोधो को असीम सुरक्षा
मेरे जीवन की निर्मल छाया
तीस साल के अटूट बंधन, तीस साल के संघर्षमय जीवन,
तीस साल के प्रबल उद्योग, तीस साल के चुनौतिपूरण जीवन के पश्चात्
आज वो वृक्ष जीवन के गोधुली पर है निश्चिंत, स्थिर, शांत, अव्याकुल
जब भी होते वो नन्ही पौधे व्याकुल, फैलाते अपने शाखाये
देते सहारा अपने मजबूत तने का , देते अहसास उन पोधो को
हम है तुम्हारे जीवन की निर्मल छाया
मेरे जीवन की निर्मल की छाया


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