Sunday, February 5, 2012

मोहब्बत कभी इस दिल को न होगी ....

मोहब्बत कभी इस दिल को न होगी ....
सोचा था कभी इस दिल ने ...
मोहब्बत कभी नहीं होगी ...
दिल कम्बक्थ, बेशर्म , बेगैरत ...
फिर भी मोहब्बत कर ही चला ...
दिल ये अपना ...फिर उसी रह पर चला ...

सोचा था कभी मोहब्बत कभी इस दिल को न होगी ...
मोहब्बत मेरी महब्बत उसकी ...मोहब्बत हमारी ...
हाय मोहब्बत ये इतनी सारी....
न उसका जोर न मेरा जोर ...
है ये हम दोनों से बेकाबू ...
हाय मोहब्बत ये इतनी सारी ...

सोचा था कभी इस दिल ने ...
मोहब्बत कभी इसको न होगी ....

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